मिथिला में यह देवी आज भी करती है राजा के छुपे हुए खजाने की रक्षा !
१२३४ ई० से लेकर १२९३ई० तक बंगाल में सेन राजवंश का शासन था | किन्तु जब वहां देवा राजवंश की स्थापना हुई तो सेन राज वंश के वारिश वहां से पलायन कर मिथिला आ गए | कैसे आया खज़ाना ! सेन वंश के एक शासक रत्नसेन...
View Article‘गंगा नदी से भी ज्यादा पवित्र ‘गया के फल्गु नदी पर छाया अस्तित्व का संकट
गया शहर के पूर्वी छोर पर पवित्र फल्गु नदी बहती है. तकरीबन पूरे साल ही लोग अपने पूर्वजों के लिए मोक्ष की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं और फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण करते हैं. पितृपक्ष के दौरान...
View Articleएक कहानी दरभंगा के दुल्हिनियाँ पोखर की !
दरभंगा राज की जितने भी तालाब हैं उसमे से लक्ष्मीसागर साधुगाछी स्थित एक ऐतिहासिक तालाब है , जिसे स्थानीय लोग दुल्हिनियाँ पोखर के नाम से जानते हैं | दरभंगा महाराज सर रामेश्वर सिंह ने इस तालाब की खुदाई...
View Articleशंकराचार्य से शास्त्रार्थ करने वाले मण्डन मिश्र कौन थे !
मण्डन मिश्र को इतिहास एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जानता हैं जिन्होंने ने शंकराचार्य को शास्त्रार्थ में तगड़ी टक्कर दी थी | उनकी पत्नी भारती ने तो शंकराचार्य शास्त्रार्थ में को हरा भी दिया था | मण्डन...
View Articleक्या विलुप्त हो जायेगा मिथिला में जुड़शीतल पर्व ?
मिथिला में जुड़शीतल पर्व बैशाख की पहली तिथि को मनाया जाता है। इसे बासी पर्व भी कहा जाता है। वैसे तो सम्पूर्ण भारत वर्ष में पर्व त्यौहार मनाये जाते हैं | लेकिन मिथिला में मनाये जाने वाले जितने भी पर्व...
View Articleकुप्रथा पर हास्यलेख द्वारा चोट करते थे डा. हरिमोहन झा
हरिमोहन झा को मैथिलि सहिया जगत में ‘ हास्य और व्यंग के सम्राट ‘ के रूप में जाना जाता है | उनके मशहुर पात्र ‘खट्टर काका’ ने उन्हें बेहद प्रसिद्धि दिलाई थी | मैथिली साहित्य के इस विशिष्ट , आधुनिक एवं...
View Articleक्या कहा था भगवान् राम ने सिमरिया धाम के सन्दर्भ में !
सिमरिया धाम को हम कल्पवास मेले के रूप में जानते हैं | इस स्थान के सबसे नजदीक बड़ा स्टेशन बरौनी और बेगुसराय है जहां पर सभी रूटों की मेल एवं एक्सप्रेस गाड़ियां रुकती है | यहाँ से आप टैम्पो , बस एवं अन्य...
View Articleभरवारा ग्राम निवासी गोनू झा थे बीरबल सरीखे मशहूर !
गोनू झा को सम्पूर्ण मिथिलांचल में बीरबल के नाम से पहचाना जाता है | जिस प्रकार बीरबल और तेनाली राम अपनी चतुराई और हाजिर जबाबी के लिए प्रसिद्ध हैं उसी तरह गोनू झा भी अपनी चतुराई और वाक्पटुता के लिए...
View Articleक्यों मिथिलाचल की मशहूर लहठी इतिहास के पन्नो में हो जाएगी दफ़न ?
सम्पूर्ण मिथिलांचल में लहठी शुभ कार्यों में पहना जाता है | शादी-विवाह के मौकों से लेकर मिथिला के हर छोटे बड़े त्योहार आदि में लाह की बनी लहठी को पहनना बहुत ही शुभ माना जाता है| मिथिलांचल में नवविवाहिता...
View Articleदरभंगा में है मुग़ल बादशाह बहादुरशाह ज़फर के पोते की कब्र !
बिहार के दरभंगा में अंतिम मुग़ल वारिस जुबैरुद्दीन गोरगन की कब्र हर मौत को शोहरत नसीब नहीं ,कुछ किरदार गुमनामी में दम तोड़ देतें है लगता है मानो ये शेर मुगल सल्तनत के अंतिम बादशाह बहादुर शाह जफर के पोते...
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